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जवानों का दैनिक कार्यक्रम

    06.00 बजे ग्राउन्ड पर सभी जवान फालीन होते है ।
    06.15 बजे लीडरों द्वारा जवानो की रिपोर्ट ली जाती है।
    06.15 बजे से 06.30 तक सीडी.आई सर को रिपोर्ट दी जाती है, और मार्चअप होता है।
    6.32 आउटडोर डीएसपी सर को रिपोर्ट होती है।
    06.32 से 06.35 तक डीएसपी द्वारा बीमार जवानो से स्वास्थ की जानकारी ली जाती है।
    06.35 से 06.40 तक धीरे-धीरे जवानों के शरीर की वर्जिस करायी जाती है।
    06.40 से 07.00 बजे तक रनिंग 4 किमी. कराई जाती है।
    07.00 बजे से 07.05 तक कूलडाउन एक्सरसाईज करायी जाती है।
    07.05 से 07.10 तक टपिंग एक्सरसाईज करायी जाती है।
    07.10 से 07.15 तक ब्रेक।
    07.15 से 07.55 तक यूऐसी करायी जाती है।
    07.55 से 08.55 तक नाश्ता दिया जाता है।
    09.00 बजे पुनः ग्राउन्ड पर फालीन किया जाता है।
    09.00 बजे से 09.40 तक ड्रिल करायी जाती है।
    09.40 से 09.45 तक ब्रेक
    09.45 से 10.30 तक वेपन की जानकारी दी जाती है।
    10.30 से 10.35 तक ब्रेक
    10.35 से 11.15 तक ड्रिल की टैक्नीकल कवायद करायी जाती है।
    11.15 से 11.20 ब्रेक
    11.20 से 12.00 तक राइफल एक्सरसाईज करायी जाती है।
    12.00 से 03.00 तक भोजन
     नोट- 4 कंपनिया 09 बजे से इन्डोर क्लास जाती है, और 4 कंपनिया ग्राउन्ड पर रहती है। यह क्रमानूासार चलता रहता है।
    3.00 बजे से ग्राउन्ड पर फालीन होते है।
    03.05 पर सीडीआई सर रिपोर्ट बाद परेड मार्च
    03.40 तक ड्रिल करायी जाती है।
    03.40 से 03.45 ब्रेक
    03.45 से 04.25  तक वेपन की जानकारी दी जाती है ।
    04.24-04.30 तक ब्रेक
    04.30 -05.10 तक ड्रिल की टेक्नीकल जानकारी दी जाती है ।
    05.10-05.15 तक ब्रेक
    05.15-05.55 तक खेल गतिविधि
    06.00 तक परेड विर्सजन
    नोटः- क्रमबार लेक्चर डीएसपी, निरीक्षक, उपनिरीक्षक द्वारा लिया जाता है ।
    07.00 तक भोजन अवकाश
    08.00 रात्रि गणना
    08.00 -10.00 तक पढाई हेतु
    10.00 से रात्री विश्राम  

        

परेड के अतिरिक्त अन्यगतिविधि जैसे फायरिंग  सेम्यूलेटर, ड्राइविंग सेम्यूलेटर से इनडोर ड्राइविंग की जानकारी दी जाती है और प्रक्टीकल हेतु नव आरक्षकों को ग्राउण में भेजा जाता है साथ ही  नव आरक्षकों को आरटीओ से संपर्क कर उनका ड्राइविंग लाइसेंस भी पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में बनवाया जाता है ।
      

नवआरक्षकों के मनोरंजन के लिये समय-समय पर पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार खेल, एवं सांस्कृतिक प्रोग्राम भी संचालित किये जाते है ।

नोट:- पुलिस मुख्यालय के आदेशानुसार ऋतु को ध्यान में रखते हुए समय परेड के समय में एवं ड्रेस कोड में भी परिवर्तन किया जाता है ।

प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

    नवआरक्षक बुनियादी प्रशिक्षण कुल 09 माह का होता है । इसमें 4-4 माह के दो सेमेस्टर होते हैं, शेष समय परीक्षाओं के लिये है। दोनों सेमेस्टर में पृथक पृथक पास होना अनिवार्य है ।
    उपरोक्तानुसार संपूर्ण 09 माह के प्रशिक्षण सत्र में चैथे माह के अंतिम सप्ताह में प्रथम सेमेस्टर तथा 9वें माह के प्रथम सप्ताह में द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षायें होंगी । इस प्रकार कुल दो बार परीक्षायें होंगी।
    दोनों सेमेस्टर में आउटडोर की परीक्षा भी होगी ।
    आंतरिक परीक्षा के प्रश्नपत्र पुलिस मुख्यालय से प्रदाय किये जाते हैं । उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग के उपरांत जाॅच जाती है और नंबर देने के उपरांत डीकोडिंग की जाती है ।
    सभी परीक्षाओं में पास होने के लिये अलग अलग विषय में 50 प्रतिशत अंक लाना होगा । प्रत्येक विषय में पास होना आवश्यक है । एससी, एसटी के सदस्यों को 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे । किंतु बाह्य परीक्षा में अंकों की छूट नहीं होगी ।
    पूरक परीक्षा पुमु द्वारा निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ही होगी ।
    उत्तरपुस्तिकाओं की रीटोटलिंग आवेदन देने पर की जा सकेगी । रीचेकिंग का कोई प्रावधान नहीं है ।

पुलिस फोर्स के सदस्यों के लिए आचार संहिता-1985

    पुलिस विभाग के सभी सदस्य अपना प्रशिक्षण समाप्त होने के उपरांत संविधान और पुलिस आचरण संहिता की शपथ लेते हैं । अस्तु यह आवश्यक है कि हम पुलिस आचरण संहिता को जानें ।
    सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और सी.पी.ओ. प्रमुखों को सम्बोधित गृह मन्त्रालय भारत सरकार द्वारा जारी पत्र संख्या- टप्.24021ध्97ध्84-ळच्।.1 दिनांक 10.7.1985 के अनुसार-

1.   पुलिस को भारतीय संविधान के प्रति पूर्ण निष्ठा रखनी चाहिए तथा उन्हें संविधान द्वारा नागरिकों को दिए अधिकारों को बनाए रखना है।

2.   पुलिस को विधिवत रूप से अधिनियमित कानून के औचित्य या आवश्यकता पर संदेह नहीं करना चाहिए। उन्हें किसी प्रकार के भय या पक्षपात, वैमनस्य या बदले की भावना से मुक्त होकर दृढ़तापूर्वक निष्पक्ष होकर कानून लागू करना चाहिए।

3.   पुलिस को अपनी शक्तियों तथा कर्तव्यों की सीमाओं को स्वीकार करके इनका आदर करना चाहिए। इन्हें व्यक्ति से बदला लेने या अपराधी को दण्ड देने के प्रयोजनार्थ न्यायपालिका के कार्र्यों का हनन करते हुए स्वयं कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।

4.   कानून का पालन सुनिश्चित करते समय या व्यवस्था कायम रखते हुए पुलिस को यथासम्भव व्यावहारिक रूप से समझाने-बुझाने के तरीके अपना कर सलाह या चेतावनी देनी चाहिए। जब बल प्रयोग अपरिहार्य हो, केवल तभी, परिस्थितियों के अनुरूप न्यूनतम बल प्रयोग करना चाहिए।

5.   पुलिस का प्रमुख कर्तव्य अपराध तथा अव्यवस्था को रोकना है। पुलिस को यह स्वीकार करना चाहिए कि अपराध तथा अव्यवस्था की अनुपस्थिति ही उनकी क्षमता और दक्षता का परिचायक है, न कि इनसे निपटते समय पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का प्रत्यक्ष प्रमाण होने पर ही उनकी दक्षता का पता चलेगा।

6.   पुलिस को यह जान लेना चाहिए कि वे भी जन साधारण के ही अंग है। अन्तर केवल इतना है कि समाज के हित में और समाज की ओर से उन्हें पूरे समय ऐसे कर्तव्यों पर ध्यान देने के लिए तैनात किया गया है, जिनका निर्वहन सामान्यतः प्रत्येक नागरिक को करना चाहिए।

7.   पुलिस को यह महसूस करना चाहिए कि उनके द्वारा सक्षम रूप से कार्य निष्पादन जनता से प्राप्त सहयोग पर आधारित है। यह सहयोग पुलिस कर्मियों के आचरण और गतिविधियों के प्रति जनता का आदर और विश्वास प्राप्त करने पर मिलता है।

8.   पुलिस को हमेशा जन कल्याण का ध्यान रखना चाहिए तथा उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाना चाहिए। उन्हें व्यक्ति की धन-सम्पत्ति या सामाजिक हैसियत पर ध्यान दिए बिना सेवा करनी चाहिए। उनके साथ मैत्री पूर्ण व्यवहार करना चाहिए तथा आवश्यक सहायता देनी चाहिए।

9.   पुलिस को हमेशा आत्महित से बढ़ कर अपनी ड्यूटी का ध्यान रखना चाहिए और चाहे कोई, उनका मजाक उड़ा रहा हो या उनका कोई तिरस्कार कर रहा हो, उन्हें शांत होकर अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए तथा दूसरों की रक्षा की खातिर अपने प्राण न्यौछावर करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

10.  उन्हें शालीन व्यवहार करना चाहिए। उन्हें निष्पक्ष होकर कार्य करना चाहिए तथा लोगों को उन पर भरोसा होना चाहिए। उनमें आत्म गौरव होने के साथ-साथ उनमें साहस जैसे गुण हों। उन्हें चरित्रवान होने के साथ-साथ लोगों का विश्वास जीतना चाहिए।

11.  उच्चतम श्रेणी की निष्ठा, पुलिस की प्रतिष्ठा का मूलभूत आधार है, इसको समझते हुए पुलिस को अपने व्यक्तिगत तथा शासकीय दोनों ही स्तरों पर आत्म संयम विकसित करना चाहिए। विचार एवं कार्य में सत्यनिष्ठ एवं ईमानदार रहना चाहिए जिससे जनता उन्हें अनुकरणीय नागरिक समझ सके।

12.  पुलिस को यह समझना चाहिए कि वह केवल अनुशासन का उच्चतर स्तर, वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अक्षुण्ण आज्ञाकारिता तथा पुलिस बल के प्रति हार्दिक निष्ठा बनाए रख कर और अपने आप को सतत् प्रशिक्षण तथा तैयारी की अवस्था में रख कर ही प्रशासन एवं देश के प्रति अपनी उपयोगिता बढ़ा सकती है।

    धर्म निरपेक्ष प्रजातन्त्र राज्य का सदस्य होने के नाते पुलिस को वैयक्तिक पूर्वाग्रहों से ऊपर उठने का लगातार प्रयास करते रहना चाहिए और धर्म, भाषा और क्षेत्रीय या जातीय भिन्नताओं से हटकर भारत के सभी लोगों में मैत्री भाव और सामान्य भाईचारे की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। महिलाओं और समाज के पिछड़े हुए वर्र्गों के प्रति अनादर की प्रथा को समाप्त करना चाहिए।

मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम -1965

    पुलिस विभाग पर पुलिस आचरण संहिता के अलावा म.प्र. शासन द्वारा अपने कर्मचारियों के लिये जारी आचरण नियम भी लागू होते हैं । इनका उल्लंघन करने पर विभागीय जाॅच और कड़ी दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है । संक्षेप में वे निम्नानुसार हैं ।

1. किन पर लागू-

1. म.प्र. के सिविल सेवकों पर
2. कार्यभारित तथा आकस्मिक व्यय से वेतन पाले वाले कर्मचारियों पर
3. स्वायत्त संस्थाओं पर भी लागू

2. किन पर लागू नहीं-

1. आॅल इंडिया सर्विसेस
2. जिनके लिये राज्यपाल आदेश जारी करें

3. शासकीय सेवकों से अपेक्षा है कि-
    1. प्रत्येक शासकीय सेवक सदैव ही-

क. पूर्ण रूप से संनिष्ठ रहे
ख. कर्तव्यपरायण रहे
ग. अशोभनीय कार्य ना करे
घ. पदीय कर्तव्यों के पालन में अशिष्ट कार्य ना करे
च. विलंबकारी नीति ना अपनाये
छ. अनुशासनहीनता ना करे
ज. आवंटित शासकीय आवास को किराये या पट्टे पर ना दे ।

2. समस्त समयों पर शासन की नीतियों का पालन करे-

क. विवाह की आयु का, पर्यावरण संरक्षण का, वन्य जीव सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संबंधी शासकीय नीतियों का
ख. महिलाओं के विरूद्ध अपराध निवारण संबंधी शासन की नीतियों का
ग. केंद्र और राज्य शासन की परिवार कल्याण संबंधी नीतियों का
4. कामकाजी महिलाओं के कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोक
5. महिलाओं के विरूद्ध कृत्यों की शिकायतों की जाॅच
6. राजनीति और निर्वाचन में भाग लेने की मनाही
7. प्रदर्शन अथवा हड़ताल में भाग लेना
8. शासकीय सेवकों द्वारा अपने हित में शासकीय दस्तावेजों का उपयोग की मनाही
9. जानकारी देना (सूचना का अधि.)
10. अवकाश पर प्रस्थान बिना स्वीकृति के नहीं
11. शासन की आलोचना की मनाही
12. चंदा एकत्रित करने की मनाही
13. मादक पेयों और औषधियों का सेवन की मनाही- सेवन करके सार्वजनिक स्थान पर नहीं जायेंगे और अभ्यासगत अतिसेवन नहीं करेंगे ।
14. अल्पायु (14 वर्ष से कम) बच्चों को रोजगार में ना लेना
15. प्रेस व मीडिया से संबंधों में ध्यान देने योग्य बातें
16. दहेज लेने व देने की मनाही
17. द्विविवाह की मनाही- धर्म/जाति की छूट नहीं । पुरूष और महिला दोनों पर लागू ।

18. कृत्य जिनके लिये पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं-

    मताधिकार प्रयोग प्रसारण या लेख विशुद्ध साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति का हो तो प्रकाशन या प्रसारण पदेन कर्तव्य के पालन में मीडिया से समक्ष आना शासन/विधायिका/ विभाग द्वारा आदेशित जाॅच में कथन/ साक्ष्य देना सामाजिक या चैरेटी कार्यक्रम में भाग लेना साहित्यिक, कलात्मक या वैज्ञानिक प्रकृति के यदाकदा होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेना खेलकूद में अव्यवसायी के रूप में भाग लेना साहित्यिक, वैज्ञानिक या पूर्व सोसाइटी या क्लब आदि के रजिस्ट्रेशन, चलाने और प्रबंध में जिनका लक्ष्य- खेल/सांस्कृतिक/ आमोद प्रमोद हो सहकारी सोसाइटी जो शासकीय सेवकों के हित के लिये गठित की गयी हो के रजिस्ट्रेशन, चलाने और प्रबंध में (इसमें कोई निर्वाचन पद धारण करना अंतर्वलित नहीं है) उपहार लेने पर नियंत्रण- स्वयं और कुटुंब के सदस्यों या उनकी ओर से कार्य करने वालों पर भी लागू संपत्ति के लेनदेन की सूचना और अनुमति की अनिवार्यता है । अचल संपत्ति विवरण वेबसाइट पर डाला जाना अनिवार्य है ।


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