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पीटीसी का इतिहास
संस्था का प्रारंभ


मध्य भारत राज्य बनने के पूर्व यह संस्था भीलपल्टन के नाम से जानी जाती थी जो 104.25 एकड़ के विस्तृत परिसर में स्थित है यही पर वर्तमान में समस्त प्रकार के प्रशिक्षण, प्रशासनिक एवं आवासीय भवन निर्मित होकर समस्त प्रशिाक्षण गतिविधियां संचालित होती है।
पुलिस प्रशिाक्षण विद्यालय इन्दौर स्वतंत्रता पूर्व भील पल्टन (सेना) रहती थी और उसी का प्रशिाक्षण भी चलता था। इसलिये पूर्व में यह भील पल्टन के नाम से प्रचलित थी। तत्पश्चात 1948 में मध्यभारत के समय इस संस्था का नामकरण आरक्षक प्रशिक्षण केन्द्र किया गया जिसे पुनः 1956 में म.प्र. बनने पर बदलकर पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के नाम में परिवर्तित किया गया जिसको सुचारू रूप से चलाने का उत्तरदायित्व प्रथम वाहिनी वि.स.बल इन्दौर के मार्गदर्शन में संचालित किया जाता रहा। इसके बाद इस इकाई को स्वतं़त्र दर्जा दिया जाकर इसके संचालन हेतु वर्ष 1959 में विशेष कर्तव्य अधिकारी की नियुक्ति की गई तत्पश्चात विशेष कर्तव्य अधिकारी के ओहदे को वर्ष 1961 में अधीक्षक पी.टी.एस. इन्दौर का नामकरण किया जाकर उन्नयन किया गया और इस पद पर दिनांक 01.03.1961 से श्री भैरोसिंह राणावत उप पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की गई। इकाई भीलपल्टन से पुलिस प्रशिाक्षण विद्यालय तक- उपलब्ध इतिहास अनुसार स्वतंत्रतापूर्व यहां पर स्टेट सेना की भील जनजाति हेतु प्रशिक्षण एंव आवास का स्थान था इसलिये यह भीलपल्टन के नाम से प्रचलित थी ।
अधीक्षक पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय इन्दौर के पद पर उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी निरंतर रूप से अप्रैल 1980 तक पदस्थ रहे और उन्हीं के मार्गदर्शन में इकाई में प्रशिक्षण कार्य किया जाता रहा। सातवें वित्त आयोग के अंतर्गत सर्वप्रथम प्रशिक्षण विद्यालय हेतु पुलिस अधीक्षक का एक पद स्वीकृत हुआ और इस पद पर सर्वप्रथम वर्ष 1980 में श्री पी.जी. केकरे पदस्थ किये गये । तब से निरंतर इस संस्था का कार्य पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के मार्गदर्शन में चलाया जाता रहा है। 27 जुलाई 2012 से इस इकाई का नाम परिवर्तित होकर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय हो गया है।वर्तमान में पुलिस अधीक्षक के रूप में श्री अजय सिंह पदस्थ है।

13वें वित्त आयोग की स्वीकृति अनुसार इकाई परिसर में प्रशसनिक भवन बाह्य प्रशिक्षण भवन,होस्टल ब्लाक, एमटी गैरेज, गैरेज हाउस, पुलिस अधीक्षक बंगला एंव उप पुलिस अधीक्षक बंगला तथा बाउन्ड्रीवाल के साथ ही परिसर स्थित समस्त आवासीय एंव प्रशासनिक भवनों को जोड़ने वाली सड़के बनाई गई है। शाला में प्रशासनिक भवनों को जोड़ने वाली सड़के बनाई गई है। साथ ही इस संस्था के आधिपत्य में फायरिंग रेंज हेतु पिपल्याहाना में 7.91 एकड़ भूमि उपलब्ध है, परन्तु इसके चारों तरफ सामान्य लोगों की बसाहट हो जाने के कारण इस भूमि का उपयोग फायरिंग रेंज हेतु नहीं होकर अन्य प्रशिक्षण गतिविधियों हेतु इसका उपयोग हो रहा है। यह अत्यन्त बेशकीमती होकर भूमि की सुरक्षा के लिये बाउन्ड्रीवाल एंव एक गार्डरूम का निर्माण किया जाना नितान्त आवश्यक हैै।

लोकार्पण
दिनांक 12 जून 2013 को मुख्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन, माननीय श्री शिवराजसिंह चैहान जी, गृहमंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता जी, महापौर श्री कृष्णमुरारी मोघे जी, और पुलिस महानिदेशक, श्री नंदन दुबे जी, अध्यक्ष पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन, श्री एस.एस. लाल जी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्री राजेन्द्र कुमार जी, प्रबंध संचालक, पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के श्री संजय राणा, जी एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में अकादमिक भवन एवं छात्रावास का उद्घाटन किया । अकादमिक भवन में 12 कक्षाऐं, लाइब्रेरी, कान्फ्रेस हाॅल, कम्प्यूटर लैब व प्रशासनिक कार्यालय है, वहीं नव निर्मित छात्रावास में 1000 से अधिक नव आरक्षको की रहने की सुविधा उपलब्ध है । नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के अवसर पर ही माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा महिला नव आरक्षक सुश्री नसरीन बानो को वाॅल क्लाईबिंग के साहसपूर्ण प्रदर्शन हेतु 25000/- रूपये के नगद पुरूस्कार से पुरूस्कृत किया गया ।
अपराधियों के अपराध करने के बदलते तौर तरीकों से निपटने के लिए एवं पुलिस प्रशिक्षणाथर््िायों में सेवा भावना लाने के लिए, प्रशिक्षण में टेªनिंग नीड एनालेसिस जोडे गये है । ब्यूरों आॅफ पुलिस रिसर्च एवं डेवप्लमेंट द्वारा गठित राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण नीति (वर्ष 2006) के अन्तर्गत पुलिस कार्य में सर्वागीण सुधार एवं राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता लाने हेतु निति निर्धारक नवीन पाठ्यक्रम के प्रमुख मार्गदर्शी सिद्वांत प्रस्तुत किये गये ।
कक्षाओं में मल्टीमीडीया प्रोजेक्टर, आॅडियों सिस्टम, स्थापित किये गये है एवं अत्याधुनिक कार्डलेस माईक, काॅलर माईक, काफे्रंस के लिए, उपलब्ध है । अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब है जिसमें 40 कम्प्यूटर तथा 02 एल.सी.डी. प्रोजेक्टर है, शीघ्र ही 100 से अधिक कम्प्यूटर और दस से अधिक एल.सी.डी.प्रोजेक्टर, प्रशिक्षण संस्थान को प्राप्त होने वाले है ।
आउटडोर ट्रेनर काॅम्पलेक्स में आधुनिक जिम, आरमोरी, तथा क्राईम सेमूलेटर रूम है । यहां पर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक चिकित्सा, आपदा प्रबंदन, व्यवहारिक रूप से सिखाया जा रहा है और बाह्य प्रशिक्षण में शारीरिक सौष्ठव, निहत्थी लडाई व योग, जंगल टेक्टीस, आधुनिक हथियारों में प्रवीणता आदि के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है ।
जवानों को शीघ्र प्रशिक्षित कर मैदानी इकाईयों में भेजा जा सकें इस उद्देश्य से नवीन छात्रावास बनायें गये है जिसमें ‘‘आर्यावर्त’’ छात्रावास में 1100 नव आरक्षक एक साथ निवास कर सकते है । संस्था मंे प्रशिक्षणत प्रशिक्षणार्थियों के लिये सात छात्रावास उपलब्ध हैं।
परीक्षा में पारदर्शिता लाने हेतु प्रश्न पत्र तथा उत्तर पुस्तिका, प्रशिक्षण शाखा पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की जाती है परीक्षा उपरांत सभी उत्तर पुस्तिकाऐं प्रशिक्षण शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल को भेजी जाती है जहां कोडिंग होने के बाद काॅपियां जांची जाती है, जांचने के बाद एवं नबंर चढाने के बाद डी कोडिंग होती है जिससे गोपनीयता बनी रहती है ।

 

 

The prestigious Police Training Collage, Indore, has its origin in the Malwa Bhil Corps, commonly and popularity called the Bhil Paltan was converted into a Police Training School and later into this famous Police Training College.

The prestigious Police Training Collage, Indore, has its origin in the Malwa Bhil Corps, commonly and popularity called the Bhil Paltan was converted into a Police Training School and later into this famous Police Training College.

 The prestigious Police Training Collage, Indore, has its origin in the Malwa Bhil Corps, commonly and popularity called the Bhil Paltan was converted into a Police Training School and later into this famous Police Training College.

A few years later they were regularly organized and stationed at Depalpur in indore territory and Dilaura in Dhar. Between 1840 and 845 the corps was moved to sardarpur, more regularly equipped and drilled, and employed locally on police and escort duties in the very districts from which it was principally recruited.

A military officer was put in command. Capt. G. C. Stockley in 1841 was made Commandant of the Malwa Bhil Corps in Dhar. Between 1840 and 1845 the Crops was moved to Sardarpur, more regularly equipped and drilled, and employed locally on police and escort duties in the very districts from which it was principally recruited.

A military officer was put in command. Capt. G.C. Stockley in 1841 was made commandent of the Malwa Bhil Corps.

In 1857 the Corps was called to Indore to protect the Residency and in assisting and escorting Col. Durand in his retreat to Sehore.

On order being restored the Corps was reconstituted at mandleshwar and sent to Sardarpur was a British station of the Central India Agency and within the state of Gwalior. it was the headquarter of the Political Agent of the Bhopawar Agency.

In 1857, Edward Thornton, a British administrator in India and a well Known writer wrote, "The peace of the country is in part preserved by a Bhil Corps, embodied in 1840. the experiment of converting them into soldiers did not appear to bear much promise, but it has succeeded to an extent that the most sanguine could scarcely have looked for: they have been trusted and they have shown themselves worthly ot trust. The expense of the Corps is supported partly by British government and partly by contributions from the princely States of Indore, Gwalior, Dhar, Jhabua And Amjhera."

Malwa Bhil Corps was an irregular Infantry Regiment of British Indian Army.

In 1905 the Corps was rearmed with the magazine rifle, designated as a Military Police Battalion and put under the charge of the political Agent Bhopawar.

in 1907 the Paltan was shifted to Indore.

this campus of Police Training College, indore is today 110 years old with a history of 180 years.


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