ताज़ा हलचल:

इंटर टोली प्रतियोगिता का समापन आईजी श्री राकेश गुप्ता रहे मुख्य अतिथि      नवआरक्षकों को क्राईम सीन का निरीक्षण      साइबर अपराध से संबन्धित कार्यशाला संपन्न।       नवआरक्षकों का जंगल कैंप संपन्न।       पेट्रोल पंप पर फायर डेमो पूर्ण।       पुलिस अधीक्षक ने प्रधान आरक्षकों को दिए दिशा निर्देश।       बेस्ट शूटर के लिए सैनिक सम्मेलन संपन्न।       आर्मी हेडक्वाटर से सीनियर अधिकारीयों का एक दल पी.टी.सी. में आया।       इस दल ने नवआरक्षकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण की प्रशंसा की।       बाल अपराधों के संबंध में नाटिका " बोल बिंदास " महाराष्ट्र के पुणे से आई टीम द्वारा मंचन।       सॉफ्ट स्किल के लिए सुन्दर कांड का आयोजन।       नवआरक्षकों का मनाया जन्मदिन।      

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हमारे बारे में।


महाविद्यालय का लक्ष्य


पुलिस कर्मियों में प्रशिक्षण के दौरान ही नैतिकता के साथ दक्षता का विकास सुनिश्चित करना ताकि देश के लिए स्वस्थ्य, संवेदनशील, चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और सक्षम पुलिस कर्मी तैयार हों.

 

हमारे उद्देश्य - प्रशिक्षण के अंत तक आप...

 

  •     पुलिस के समक्ष आने वाले व्यक्ति की समस्या का सही निवारण करवा सकेंगें ।

  •     अपराध नियंत्रण की प्रविधियों का प्रयोग कर सकेगें ।

  •     किसी घटना से संबंधित रिपोर्ट को समझकर सही अधिनियम व धाराओं का प्रयोग कर सकेगें ।

  •     पुलिस कार्यवाही संबंधी उपयोगी व निर्धारित फाम्र्स को सही तरीके से तैयार कर सकेंगें ।

  •     परेड और ड्रिल संबंधी कार्यवाही का उत्कृष्ट प्रर्दशन कर सकेंगें ।

  •     अधिक स्वस्थ्य चुस्त दुरुस्त होकर सभी आब्टेकल्स को निर्धारित समय में क्रास कर लेंगें ।

  •     पुलिस द्वारा उपयोग में लाये जा रहे हथियारों की पहचान, प्रयोग और फायर कर सकेंगें ।

  •     कम्प्यूटर एवं अॅाफिस उपकरणों की पहचान और प्रयोग कर सकेंगें ।

  •     पुलिसिंग हेतु प्रयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों व प्रविधियों का प्रयोग कर सकेंगें ।

  •     पुलिस वाहनों के कलपुर्जो की पहचान कर सकेेंगें और वाहन चला सकेंगें ।

  •     न्यायालय के निर्देशों को समझ कर तामील कर सकेगें ।

  •     आरक्षक के रूप में अपनी भूमिका का उपयुक्त निर्वहन कर सकेंगे ।


पीटीसी का इतिहासः-



संस्था का प्रारंभः-


मध्य भारत राज्य बनने के पूर्व यह संस्था भीलपल्टन के नाम से जानी जाती थी जो 104.25 एकड़ के विस्तृत परिसर में स्थित है यही पर वर्तमान में समस्त प्रकार के प्रशिक्षण, प्रशासनिक एवं आवासीय भवन निर्मित होकर समस्त प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित होती है।

पुलिस प्रशिाक्षण विद्यालय इन्दौर स्वतंत्रता पूर्व भील पल्टन (सेना) रहती थी और उसी का प्रशिाक्षण भी चलता था। इसलिये पूर्व में यह भील पल्टन के नाम से प्रचलित थी। तत्पश्चात 1948 में मध्यभारत के समय इस संस्था का नामकरण आरक्षक प्रशिक्षण केन्द्र किया गया जिसे पुनः 1956 में म.प्र. बनने पर बदलकर पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय के नाम में परिवर्तित किया गया जिसको सुचारू रूप से चलाने का उत्तरदायित्व प्रथम वाहिनी वि.स.बल इन्दौर के मार्गदर्शन में संचालित किया जाता रहा। इसके बाद इस इकाई को स्वतं़त्र दर्जा दिया जाकर इसके संचालन हेतु वर्ष 1959 में विशेष कर्तव्य अधिकारी की नियुक्ति की गई तत्पश्चात विशेष कर्तव्य अधिकारी के ओहदे को वर्ष 1961 में अधीक्षक पी.टी.एस. इन्दौर का नामकरण किया जाकर उन्नयन किया गया और इस पद पर दिनांक 01.03.1961 से श्री भैरोसिंह राणावत उप पुलिस अधीक्षक की नियुक्ति की गई। इकाई भीलपल्टन से पुलिस प्रशिाक्षण विद्यालय तक- उपलब्ध इतिहास अनुसार स्वतंत्रतापूर्व यहां पर स्टेट सेना की भील जनजाति हेतु प्रशिक्षण एंव आवास का स्थान था इसलिये यह भीलपल्टन के नाम से प्रचलित थी ।

अधीक्षक पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय इन्दौर के पद पर उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी निरंतर रूप से अप्रैल 1980 तक पदस्थ रहे और उन्हीं के मार्गदर्शन में इकाई में प्रशिक्षण कार्य किया जाता रहा। सातवें वित्त आयोग के अंतर्गत सर्वप्रथम प्रशिक्षण विद्यालय हेतु पुलिस अधीक्षक का एक पद स्वीकृत हुआ और इस पद पर सर्वप्रथम वर्ष 1980 में श्री पी.जी. केकरे पदस्थ किये गये । तब से निरंतर इस संस्था का कार्य पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के मार्गदर्शन में चलाया जाता रहा है। 27 जुलाई 2012 से इस इकाई का नाम परिवर्तित होकर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय हो गया है।वर्तमान में पुलिस अधीक्षक के रूप में श्रीमती मनीषा पाठक सोनी पदस्थ है।

13वें वित्त आयोग की स्वीकृति अनुसार इकाई परिसर में प्रशसनिक भवन बाह्य प्रशिक्षण भवन,होस्टल ब्लाक, एमटी गैरेज, गैरेज हाउस, पुलिस अधीक्षक बंगला एंव उप पुलिस अधीक्षक बंगला तथा बाउन्ड्रीवाल के साथ ही परिसर स्थित समस्त आवासीय एंव प्रशासनिक भवनों को जोड़ने वाली सड़के बनाई गई है। शाला में प्रशासनिक भवनों को जोड़ने वाली सड़के बनाई गई है। साथ ही इस संस्था के आधिपत्य में फायरिंग रेंज हेतु पिपल्याहाना में 7.91 एकड़ भूमि उपलब्ध है, परन्तु इसके चारों तरफ सामान्य लोगों की बसाहट हो जाने के कारण इस भूमि का उपयोग फायरिंग रेंज हेतु नहीं होकर अन्य प्रशिक्षण गतिविधियों हेतु इसका उपयोग हो रहा है। यह अत्यन्त बेशकीमती होकर भूमि की सुरक्षा के लिये बाउन्ड्रीवाल एंव एक गार्डरूम का निर्माण किया जाना नितान्त आवश्यक हैै।

लोकार्पण दिनांक 12 जून 2013 को मुख्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन, माननीय श्री शिवराजसिंह चैहान जी, गृहमंत्री श्री उमाशंकर गुप्ता जी, महापौर श्री कृष्णमुरारी मोघे जी, और पुलिस महानिदेशक, श्री नंदन दुबे जी, अध्यक्ष पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन, श्री एस.एस. लाल जी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्री राजेन्द्र कुमार जी, प्रबंध संचालक, पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के श्री संजय राणा, जी एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में अकादमिक भवन एवं छात्रावास का उद्घाटन किया । अकादमिक भवन में 12 कक्षाऐं, लाइब्रेरी, कान्फ्रेस हाॅल, कम्प्यूटर लैब व प्रशासनिक कार्यालय है, वहीं नव निर्मित छात्रावास में 1000 से अधिक नव आरक्षको की रहने की सुविधा उपलब्ध है । नवनिर्मित भवन के उद्घाटन के अवसर पर ही माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा महिला नव आरक्षक सुश्री नसरीन बानो को वाॅल क्लाईबिंग के साहसपूर्ण प्रदर्शन हेतु 25000/- रूपये के नगद पुरूस्कार से पुरूस्कृत किया गया ।

अपराधियों के अपराध करने के बदलते तौर तरीकों से निपटने के लिए एवं पुलिस प्रशिक्षणार्थियों में सेवा भावना लाने के लिए, प्रशिक्षण में ट्रेनिंग नीड एनालेसिस जोडे गये है । ब्यूरों आॅफ पुलिस रिसर्च एवं डेवप्लमेंट द्वारा गठित राष्ट्रीय पुलिस प्रशिक्षण नीति (वर्ष 2006) के अन्तर्गत पुलिस कार्य में सर्वागीण सुधार एवं राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता लाने हेतु निति निर्धारक नवीन पाठ्यक्रम के प्रमुख मार्गदर्शी सिद्वांत प्रस्तुत किये गये ।

कक्षाओं में मल्टीमीडीया प्रोजेक्टर, आॅडियों सिस्टम, स्थापित किये गये है एवं अत्याधुनिक कार्डलेस माईक, काॅलर माईक, काफे्रंस के लिए, उपलब्ध है । अत्याधुनिक कम्प्यूटर लैब है जिसमें 40 कम्प्यूटर तथा 02 एल.सी.डी. प्रोजेक्टर है, शीघ्र ही 100 से अधिक कम्प्यूटर और दस से अधिक एल.सी.डी. प्रोजेक्टर, प्रशिक्षण संस्थान को प्राप्त होने वाले है ।

आउटडोर ट्रेनर काॅम्पलेक्स में आधुनिक जिम, आरमोरी, तथा क्राईम सेमूलेटर रूम है । यहां पर प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक चिकित्सा, आपदा प्रबंदन, व्यवहारिक रूप से सिखाया जा रहा है और बाह्य प्रशिक्षण में शारीरिक सौष्ठव, निहत्थी लडाई व योग, जंगल टेक्टीस, आधुनिक हथियारों में प्रवीणता आदि के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है ।

जवानों को शीघ्र प्रशिक्षित कर मैदानी इकाईयों में भेजा जा सकें इस उद्देश्य से नवीन छात्रावास बनायें गये है जिसमें ‘‘आर्यावर्त’’ छात्रावास में 1100 नव आरक्षक एक साथ निवास कर सकते है । संस्था में प्रशिक्षणत प्रशिक्षणार्थियों के लिये सात छात्रावास उपलब्ध हैं।

परीक्षा में पारदर्शिता लाने हेतु प्रश्न पत्र तथा उत्तर पुस्तिका, प्रशिक्षण शाखा पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की जाती है परीक्षा उपरांत सभी उत्तर पुस्तिकाऐं प्रशिक्षण शाखा, पुलिस मुख्यालय भोपाल को भेजी जाती है जहां कोडिंग होने के बाद काॅपियां जांची जाती है, जांचने के बाद एवं नबंर चढाने के बाद डी कोडिंग होती है जिससे गोपनीयता बनी रहती है ।


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नवीन भवन

पी.टी.सी.इंदौर के लिए लगभग 35 करोड़ रू. की राशि से कई नये भवन जैसे नवीन प्रशासनिक और अकादमिक भवन, होस्टल, आउटडोर ट्रेनिंग काॅम्प्लेक्स, मेगज़ीन, आर्मरी, सिम्यूलेटर हाल,एम.टी. वर्कशाप, परेड ग्राउंड, स्टेडियम, रनिंग ट्रेक, क्लाइंबिग वाल, फेकल्टी गेस्ट हाउस और 11 आवासगृहों का निर्माण किया गया है ।


उपलब्ध सुविधाए


पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय इंदौर प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से प्रत्येक भवनों का नामकरण किया गया है-
“नालंदा -     पी.टी.सी. इंदौर में प्रशासनिक और अकादमिक भवन नालंदा है जिसमें  अकादमिक भवन में 720 की बैठक क्षमता के कुल 12 क्लासरूम्स के साथ एक कांफ्रेंस रूम, एक आडिटोरियम-

आकाशगंगा- द गेलेक्सी, उपलब्ध है जिसमें पीटीसी के सभी नव आरक्षक एक साथ वैठ कर सांस्कृतिक कार्यक्रम या अन्य कार्यक्रम आयोजित कर सकते है ।


आर्यावत-


    पीटीसी में नवआरक्षकों के लिए एक विशाल छात्रावास आर्यावत है जिसके अंदर 1100 नव आरक्षकों को एक साथ रहने और खाने की सुविधा उपलब्ध है । साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए टेलीवीजन लगाए गए है ।


मैस-


    -मैस मे स्वच्छ, पौष्टिक भोजन अत्यंत कम रेट्स में बनाया जाता है । यहा का किचन हाइजीनिक एंड मेकेनाइज्ड है । मैस का संचालन प्रशिक्षणार्थियों की समिति (स्वतंत्र निर्वाचन द्वारा गठित) द्वारा किया जाता है ।


“वज्र“-


मेगज़ीन, उपलब्ध है इसके अंदर टेनिंग का एम्यूनेशन और लाकर है ।


एम.टी.-


    महाविद्यालय में वाहन वर्कशाप उपलब्ध है  जिसके अंदर पीटीसी में  उपलब्ध वाहनो का उचित रखरखाव किया जाता है ।


परेड ग्राउंड-


    , महाविद्यालय में तीन परेड ग्राउण्ड, एक स्टेडियम, 400 मी. का रनिंग ट्रेक, एक क्लाइंबिग वाॅल, एक मिनिएचर फायरिंग रेंज उपलब्ध है ।


”अयोध्या“-


     प्राचीन श्रीराम मंदिर, स्थित है यह काफी वर्ष पुराना मंदिर है


“रेड चिलीज”-


     -टी केंटीन है जिसमें पीटीसी के ही कर्मचारियों द्वारा चाय नाश्ता बनाया जाता है जिससे नवआरक्षकों को ताजा तथा उचित मूल्य पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके ।


पुलिस हाट-


     महा विद्यालय में ड्राय कैटीन की सुविधा उपलब्ध है जो को-आपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से चलाया जाता है । ड्राय कैटीन में उपलब्ध सामान जिसमें किराना का सामान भी उपलब्ध है

वह बाजार के मूल्य से 30 प्रतिशत कम मूल्य से प्राप्त होता है ।


”शुभालय“-


     -फेकल्टी गेस्ट हाउस  है । महाविद्यालय में नवआरक्षकों के लिए जो विशेष कार्यक्रम चलाए जाते है उसमें पधारे फेकेल्टी के लिए गेस्ट हाउस उपलब्ध है ।  


मीमांसा-


     , - लाइब्रेरी हैं । इसके अंन्र्तगत 6000 पुस्तकों की एक विशाल वातानुकूलित पुस्तकालय है और साथ ही बाजार से विभिन्न मासिक पत्रिकाओं को भी क्रय किया जाता है  जिससे महाविद्यालय में पदस्थ शासकीय सेवकों के साथ-नवआरक्षकों के लिये ज्ञानवर्धक होती है । इकाई की लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की लगभग 4000 किताबें हैं जिन्हें नवआरक्षक इशु कराकर पढ़ सकते हैं ।


कम्प्यूटर विंग


     -महाविद्यालय में तीन आधुनिक कम्प्यूटर लैब्स है इकाई में तीन कम्प्यूटर लैब हैं-

     -कम्प्युटर लेब 60 प्रशिक्षण हेतु

     -सी.सी.टी.एन.एस. ट्रेनिंग लैब 24 कम्प्यूटर सहित ।



नोवा


(ओल्ड लैब- 40 कम्प्यूटर्स), सुपरनोवा (सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट-25 कम्प्यूटर्स) और साइरस (न्यू लैब- 60 कम्प्यूटर्स) ।
     जिसमें कम्प्यूटर एप्लीकेशन, साइबर क्राइम, क्राइम सिमुलेशन साफ्टवेयर और आई.टी. एप्लीकेशंस का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा । कक्षाओं में व्हाइट बोर्ड के साथ मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर,

इंटरएक्टिव व्हाइट बोर्ड और आडियो सिस्टम्स भी उपलब्ध हैं ।  

 
”प्रवीर“-


     - आउटडोर ट्रेनिंग कॉम्प्लेक्स में इकाई का कंट्रोल रूम/रोजनामचा है । इस भवन में आधुनिक मशीनों से युक्त जिम, आर्मरी और क्राइम सिमुलेशन रूम स्थापित है । निकट ही नयी

आर्मरी निर्माणाधीन है ।



”पार्थ“

     -सटीक निशानेबाजी की ट्रेनिंग के लिये अत्याधुनिक फायरिंग सिमुलेटर है जिसमें एक साथ 10 नवआरक्षक निशानेबाजी का अभ्यास कर सकते है ।


”सारथी“-


    -यह एक ड्राइविंग सिम्यूलेटर है जो महाविद्यालय में स्थापित किये गया है जिसमें  नवआरक्षकों को वाहन चालन का अभ्यास कराया जाता है जिससे समय, श्रम, एम्यूनीशन और ईंधन की बचत होगी और ज्यादा से ज्यादा अभ्यास होगा । ड्राइविंग के साथ मोटर मेकेनिज्म, रोड सेफ्टी एण्ड ट्रेफिक ड्रिल की भी प्रेक्टिकल ट्रेनिंग इनहाउस ही दी जा सकेगी । वार फेयर और टेक्टिकल ट्रेनिंग के लिये पार्थ सारथी में ही सैंड माडलरूम तैयार किया गया है ।


”आरोग्यम“-


    इकाई में एक चिकित्सालय ”आरोग्यम्“ है जिसमें प्राथमिक चिकित्सा व फिजियोथेरपी की सुविधाएंे उपलब्ध है साथ ही समय-समय पर नवआरक्षकों को स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी भी दी जाती है । वायरल जनित बीमारियों  से बचाव के लिए डा. श्री प्रदीप जोशी द्वारा विभिन्न तरीकों से अवगत कराया जाता है । महाविद्यालय के इस चिकित्सालय में बेड की भी व्यवस्था है जो साधारण बीमारी में नव आरक्षकों के इलाज के लिए उपयोगी है । यूनिट चिकित्सक के अतिरिक्त ए.एस.आई श्री हरिप्रसाद तिलवे, प्रधान आरक्षक 33 श्री कुलदीप आरक्षक श्री दीपक शुक्ला, श्री पुरोहित तथा महिला नर्स श्रीमती कलावती जी के द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है ।

 
”पेट्रोलपम्प“-


     महाविद्यालय में वेलफेयर से संबंधित एक पेट्रोल पंप संचालित किया जाता है  जिसमें पेट्रोल और डीजल की सुविधा पहले से ही थी और अब सी.एन.जी की सुविधा का उद्दघाटन भी

दिनांक 21.112014 को महाविद्यालय के एडीजी श्री ए.के. जैन और पुलिस अधीक्षक श्रीमती मनीषा पाठक सोनी ने किया ।


”ए.टी.एम.“-


     परिसर में नव आरक्षक के लिए वेलफेयर के अन्र्तगत तीन एटीएम मशीन को स्थापित की गयी है जिससे नव आरक्षकों को रुपये की आवश्यकता होने पर कहीं दूर नहीं जाना पड़े इससे पुलिस वेलफेयर में 3,60,000/रु वार्षिक आय होती है ।

    साथ ही इकाई में अन्य सुविधाओं के अन्र्तगत गार्डनर, बारबर, वाशरमैन, शू-मेकर, टेलर, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, मेशन और स्वीपर्स हैं और साथ ही परिसर में एक झूलाघर, एक बालोद्यान, नर्सरी, रोज गार्डन एक जिम्नेशियम, फ्लोर स्क्रबर मशीन, डिश वाशर मशीन, वाशिंग मशीन, क्लाथ ड्रायर, शू-पालिश मशीन, वाटर प्यूरीफिकेशन की सुविधायें भी हैं ।
    साथ ही पीटीसी में  विशेष आॅब्स्टेकल कोर्स डिजाइन किया गया है । प्रशिक्षणार्थियों को 07 दिन के जंगल कैंप में भी फील्ड क्राफ्ट टेक्टिक्स का अभ्यास कराया जाता है ।  प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिये प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन का नियमित अभ्यास कराया जाता है।


प्रशिक्षण संसाधन


  •     प्रशिक्षक

  •     मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर,

  •     इंटरएक्टिव व्हाइट बोर्ड और आडियो सिस्टम,

  •     वातानूलित आधुनिक कान्फ्रंस हाल

  •     वातानूलित कम्प्यूटर लैब  एल.सी.डी. प्रोजेक्टरयुक्त।

  •     फायरिंग सिमूलेटर

  •     ड्रायविंग सिमुलेटर

  •     बयोमेट्रिक मशीन द्वारा अटेन्डेन्स

  •     साफ्टवेयर  द्वारा प्रशिक्षण

  •     सी.डी. लाईब्रेरी

  •     टोटल 115 कम्प्यूटर उपलब्ध हैं

  •     टी. ओ. टी. ट्रेन्ड प्रशिक्षण

  •     सी.सी.टी.एन.एस. प्रशिक्षण

  •     टी.ओ.टी. ट्रैंड प्रशिक्षण गण

  •     सी.डी. लाइबे्ररी

  •     क्राइम सीन साफ्टवेयर

 

प्रस्तावित योजना:-


परिसर में सी.सी.टी.वी.केमरा युक्त करने की योजना ।

अकादमिक भवन को वाई-फाई सुविधा से लैस बनाये जाने की योजना है । शीघ्र ही प्रत्येक नवआरक्षक की गतिविधियों और उपलब्धियों का लेखाजोखा रखने के लिये इन्हें आर.एफ. टैग दिये जाने की योजना है।

 

 


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